Tuesday, 20 December 2011

नये साल की दस्तक....

यूं ही कुछ दिनों में,
यह साल भी गुजर जायेगा।
सौगात के रूप में नया,
साल दस्तक ले आयेगा।
बीते साल की रह जायेगी,
तो वह होगी केवल यादे।
 इसमंे कही सुखों तो कई,
दुखों की रह जायेगी बातें।
रामदेव, अन्ना का हुआ हो अनशन,
या कई घोटालों का खुलासा।
देश की अर्थव्यवस्था से लेकर,
राजनैतिक सभी जगह रही विवशता।
संसद कारावाई पहुंची सड़को तक,
तो देश की पक्ष- विपक्ष पार्टियों की,
आलोचना हुई हर गली- महौले पर।
इस साल कई मुद्दों और,
परेशानियों का हुआ है पर्दाफाश।
जनता सरकार से लगाये बैठी है आस,
 अपनी परेशानियोे का मांग रही है हिसाब।

उम्मीद है, नया साल लाये ऐसी सौगात।




Saturday, 17 December 2011

पेट की ये माया.....

ये पापी पेट न जाने
क्या-क्या करायें।
किसी को राजा तो
किसी को रंक बनाये।
ये पेट की ही है माया,
जो अमीर और गरीब
दोनों को है भाया।
गरीब लड़े दो जून की
रोटी के लिये।
तो अमीर लड़े अपनी
आने वाली पीड़ी के लिये।
जो है भ्रष्टाचार बढ़ाने मे सहायक,
जिसमे पायी है कई लोगों ने महारत।
कसूर पेट का नही,
है अमीरों की नियत में।
इसमें गरीबों को देनी,
पड़ती है नसीहत फ्री में।
क्यों आज भूख की,
परिभाषा हो गयी है गलत।
जिससे आम आदमी है अन्जान,
देश में महगाई, आतंकवाद, जैसी,
कई बिमारियों से है,
हैरान और परेशान।