Saturday, 7 April 2012

बता दे कोई हमें............


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Friday, 9 March 2012

दोस्ती के मायने......l

जाने क्या बात हुई उस दोस्ती में,
                         जो जीने के एक साथ करते थे वादें
और साथ मरने की खाई थी कसमें,
                     फिर क्यों बदल गये दोस्ती के मायने।
हो अगर कोई गलती भी तो,
                   ना करना उस पर तुम बुरा सितम।
क्योकि जिंदगी जीने का हर किसी,
                 का होता हैे, अपना अनोखा ढ़ग।
दें सके अगर उसे तो देना एक मौका,
               दोस्ती केवल नाम नही, है हवा का झौका।
जो बदले किसी की जिेदगी के मायने,
               जिंदगी में सही राह दिखाये ये मान ले।
दोस्ती केवल दो विचारों का मेल नही,
               अटूट समझदारी, विश्वास का होता हैं, रिश्ता।
जिसने वास्तव में निभा लिया ये रिश्ता,
               कई रिश्तों से बढ़कर होता है, ये रिश्ता।

Saturday, 3 March 2012

दें खुल के जीनें की आजादी.......

क्यों चाह कर भी इंसान,
           वो कुछ कर नही सकता।

जो उसका हक, अधिकार
          या जरूरत हैे होती।
ये बंदिशें और शक,
          करने की आदतें।
किसी भी इन्सान को खुल, 
          के जीने नही दे सकेगी।
दे अगर मां- बाप खुल
         के जीने अपने बच्चों को।
तो क्या पता उनके नाम से
         ही बन जाये पहचान उनकी।
ना कर समाज की चिंता
        तू अपने बच्चों के लिये।
ना देगा कल समाज,
          देगें बच्चें तूझे जीने के लिये।
क्योंकि समाज से ज्यादा जरूरत,
         होती हर किसी को परिवार की,
सही मायने में बच्चों की खुशी,
         ही हैं मां- बाप की असली खुशी।