जाने क्या बात हुई उस दोस्ती में, जो जीने के एक साथ करते थे वादें
और साथ मरने की खाई थी कसमें,
फिर क्यों बदल गये दोस्ती के मायने।
हो अगर कोई गलती भी तो,
ना करना उस पर तुम बुरा सितम।
क्योकि जिंदगी जीने का हर किसी,
का होता हैे, अपना अनोखा ढ़ग।
दें सके अगर उसे तो देना एक मौका,
दोस्ती केवल नाम नही, है हवा का झौका।
जो बदले किसी की जिेदगी के मायने,
जिंदगी में सही राह दिखाये ये मान ले।
दोस्ती केवल दो विचारों का मेल नही,
अटूट समझदारी, विश्वास का होता हैं, रिश्ता।
जिसने वास्तव में निभा लिया ये रिश्ता,
कई रिश्तों से बढ़कर होता है, ये रिश्ता।
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