Wednesday, 31 August 2011

दोस्ती की दासता...


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Sunday, 28 August 2011

गुरू- शिष्य...


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Thursday, 25 August 2011

जानों राष्ट्रभाषा हिन्दी की महत्ता...

कहने को तो भारत की राष्ट्रभाषा है हिन्दी,
सबसे ज्यादा बोली, सुनी, जानने वाली भाषा है हिन्दी।
लेकिन देश के कुछ लोगों तक ही सीमित रह गयी है हिन्दी,
निरंतर विलुप्ती की कगार में जाती दिख रही है हिन्दी।
मानना होगा हमें इस बाॅलीबुड़ का शुक्रिया,
जिसने काफी हद तक बचाये रखी है हिन्दी की महत्ता।
संसद से न्यायलय या उच्च पदों पर आसीन देश के नेता,
सभी के दिलों जुवान में है अंग्रजी का बोलबाला।
आज देश की उच्च स्तरीय शिक्षा में अनिर्वायता है इंग्लिश,
इंग्लिश के अभाव में ही कई बार झेलनी पड़ जाती है मुश्किल।
सही मायने मे केवल इंग्लिश से ना हो आंकलन व्यक्ति का,
राष्ट्रभाषा से ही संवरेगा व्यक्तित्व देश के हर व्यक्ति का।
यदि देश में ही परिपक्व होती है हिन्दी की महत्ता,
विश्व स्तर पर स्थापित करने में सभी को होगी विवशता।
जाग कर  हे भारत के युवा पहुंचाओं तुम इसे शिखर पर,
तभी होगा राष्ट्रहित और तुम्हारे कार्यो में प्रखरता।


Wednesday, 24 August 2011

नारी समाज का आईना...

हर किसी लड़की का सपना है आसमान छूना,
            लेकिन क्या उसका कसूर है लड़की होना?
लड़की होने का ही उसे भुगतना पड़ता है खामियाजा,
            जिन्दगी के कई पहलुओं में करना पड़ता है समझौता।
बचपन से जवानी तक जो है अपने मां- बाप की छाया,
           फिर पूरी जिन्दगी सास- ससुर पति का उस पर साया।
बेटी, पत्नी, मां कई रूपों में जानी जाती है एक नारी,
          वही लक्ष्मी, दुर्गा, काली कई रूपों में पूजी जाती है एक नारी।
मानों तो कई देवियों की मूरत होती है एक नारी,
         ना मानों  तों एक भोग्या बन कर रह जाती है एक नारी।
पराये घर में है जो उसके सास- ससुर देवर नन्द
        मानों जैसे अपने ही हो मां- बाप, भाई, बहन
वही जब आये उसके अधूरे जीवन में बच्चे का साया।
       मानों जैसे कई जन्मों से हो उस रिश्ते से नाता।
खुद को गीले में और बच्चे को सुखें मे सुलाकर
      कई संधर्षो से बच्चें को बड़ा करती है मां
दुनिया की किसी कमी को अछूता न रखकर
      अच्छी से अच्छी सुविधाये देती है मां
लड़की से मां बनने तक का सफर
      हर किसी नारी के लिये है कठिन संघर्ष
 आंचल में दूध आंखों में पानी,
     नारी तेरी यही कहानी, नारी तेरी यही कहानी


Tuesday, 23 August 2011

सरकार को करना ही होगा लोक बिल पास...

भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार,
    देश के हर एक कोने में छाया है ये भ्रष्टाचार।
छोटे पद पर आसीन हो या बड़े पद पर,
    सभी के दिलों को लुभा रहा हैं ये भ्रष्टाचार।।
सुरेश कलमाड़ी हो या ए राजा,
    चण्हाड़ से लेकर कैनिमोझी, बज गया सबका बाजा।
सभी के जीवन में है भ्रष्टाचार का साया,
    भ्रष्ट तंत्र के समय बाबाजी का आसन ड़गमगाया।
देश की सत्ता जिनके हाथों में है समाइर्,
    वे सभी खुलेआम कर रहे है कालेधन की कमाई।
अब तो अन्ना का लोकपाल बिल ही काम आयेगा,
    देश को भ्रष्टाचारियों से मुक्त करायेगा।
मंहगाई, भ्रष्टाचार, आंतकवाद को जड़ से मिटायेगा,
   देश की वास्तविक गुलामी से मुक्ति दिलायेगा।
अन्ना हजारे के साथ है हजारों¬ लांखों का साथ, 
    अब तो सरकार को करना ही होगा लोक बिल पास।
तभी ये देश भ्रष्ट न होकर सोने की चिडि़या कहलायेगा।
    भ्रष्ट देश की सूची में ना आकर विश्व को मागदर्शन करायेगा।



बुढ़ापे में ना होगी विवशता, जीने की होगी सरलता...

हर मां बाप की दो आंख होते है बेटा और बेटी,
       उन्ही दो आंखों की रक्षा का सूत्र है रक्षाबंधन।
भाई और बहन, दुनिया का निराला है ये रिश्ता,
       मनो कभी दो दुश्मन और दोस्ती का हो ये रिश्ता।
भाई के सुख में सुखी, दुख मे दुखी रहती है बहना,
       वही अपनी बहनों की हर पल भाई करते है रक्षा।
द्रौपती की तरह ही हर दर्द को बांटती है हर एक बहना,
       कृष्णा जैसे जीवन के हर दर्द को दूर करते है भईया।
बचपन से जवानी तक अनूठा है ये रिश्ता,
       बहन के पराये होने पर हर दम याद दिलाता है ये रिश्ता।
 एक साथ एक घर में रहने पर कई बार हुई हो आना कानी,
       बदलते समय के साथ फिर नही चलती अपनी मनमानी।
भाई बहन का होना, हर घर के लिये निराला है ये रिश्ता
       बेटे की चाह में अधूरा रह जाता है ये रिश्ता।
किसी भाई की बहन और बहन का भाई ना होना,
      जिससे होने लगता है घर परिवार अधूरा, सूना।
यदि सोचे कभी मां- बाप अपनी दोनो आंखों की महत्ता,
     ते बुढ़ापे में ना होगी विवशता, जीने की होगी सरलता।