Wednesday, 14 September 2011

बारिश की मस्ती...

बारिश का होना मानो जैसे,
नेचर का रोना, फिर भी।
बारिश में दिल का महकना और,
मिट्टी की खुशबु को पाना।
बारिश में छतों में नहाना और,
मस्ती से एक- दूसरे को भिगाना।
बारिश में छतरी ले जाना और,
भिगते हुए घर को वापस  आ जाना।
बारिश में कीट- पतंगों का आना,
हमारे दिल में ड़र का एहसास जगाना।
बारिश में सुन्दर फूलों का खिलना,
घर में चारों ओर खुशबु फैलाना,
बारिश में सभी का घर में रहना
साथ बैठ अच्छे पकवानों को खाना
बारिश के है ये कुछ सुनहरे पल,
जो सभी को याद आते है हरदम।

2 comments: