हर मां बाप की दो आंख होते है बेटा और बेटी,
उन्ही दो आंखों की रक्षा का सूत्र है रक्षाबंधन।
भाई और बहन, दुनिया का निराला है ये रिश्ता,
मनो कभी दो दुश्मन और दोस्ती का हो ये रिश्ता।
भाई के सुख में सुखी, दुख मे दुखी रहती है बहना,
वही अपनी बहनों की हर पल भाई करते है रक्षा।
द्रौपती की तरह ही हर दर्द को बांटती है हर एक बहना,
कृष्णा जैसे जीवन के हर दर्द को दूर करते है भईया।
बचपन से जवानी तक अनूठा है ये रिश्ता,
बहन के पराये होने पर हर दम याद दिलाता है ये रिश्ता।
एक साथ एक घर में रहने पर कई बार हुई हो आना कानी,
बदलते समय के साथ फिर नही चलती अपनी मनमानी।
भाई बहन का होना, हर घर के लिये निराला है ये रिश्ता
बेटे की चाह में अधूरा रह जाता है ये रिश्ता।
किसी भाई की बहन और बहन का भाई ना होना,
जिससे होने लगता है घर परिवार अधूरा, सूना।
यदि सोचे कभी मां- बाप अपनी दोनो आंखों की महत्ता,
ते बुढ़ापे में ना होगी विवशता, जीने की होगी सरलता।
उन्ही दो आंखों की रक्षा का सूत्र है रक्षाबंधन।
भाई और बहन, दुनिया का निराला है ये रिश्ता,
मनो कभी दो दुश्मन और दोस्ती का हो ये रिश्ता।
भाई के सुख में सुखी, दुख मे दुखी रहती है बहना,
वही अपनी बहनों की हर पल भाई करते है रक्षा।
द्रौपती की तरह ही हर दर्द को बांटती है हर एक बहना,
कृष्णा जैसे जीवन के हर दर्द को दूर करते है भईया।
बचपन से जवानी तक अनूठा है ये रिश्ता,
बहन के पराये होने पर हर दम याद दिलाता है ये रिश्ता।
एक साथ एक घर में रहने पर कई बार हुई हो आना कानी,
बदलते समय के साथ फिर नही चलती अपनी मनमानी।
भाई बहन का होना, हर घर के लिये निराला है ये रिश्ता
बेटे की चाह में अधूरा रह जाता है ये रिश्ता।
किसी भाई की बहन और बहन का भाई ना होना,
जिससे होने लगता है घर परिवार अधूरा, सूना।
यदि सोचे कभी मां- बाप अपनी दोनो आंखों की महत्ता,
ते बुढ़ापे में ना होगी विवशता, जीने की होगी सरलता।
aaj k youth ko Rakshabandhan ka sahi arth aur bado ko ek samvedansheel ehsaas kara diya...
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